Plus Two Hindi Solution Chapter2 बेटी के नाम (जवाबी पत्र)

Plus Two Hindi Solution Chapter2 बेटी के नाम (जवाबी पत्र)

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Board SCERT, Kerala
Text Book NCERT Based
Class Plus Two
Subject Hindi Textbook Solution
Chapter Chapter 2
Chapter Name बेटी के नाम (जवाबी पत्र)
Category Plus Two Kerala


Kerala Syllabus Plus Two Hindi Textbook Solution Chapter  2  बेटी के नाम (जवाबी पत्र)

Plus Two Hindi Textbook Solutions 



Chapter 2  बेटी के नाम (जवाबी पत्र) Textbook Solution

प्रश्न 1.
हिंदी में अन्य भाषाओं से आए हुए कई शब्द हैं। निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी विदेशी शब्द पत्र से ढ़कर लिखें।
अनाथ – …………………….
सांत्वना – …………………….
देश – …………………….
नाश – …………………….
संभावना – …………………….
विधवा – …………………….
बार – …………………….
इनाम – …………………….
योग्य – …………………….
व्यक्ति – …………………….
चिंता – …………………….
उत्तरः
अनाथ – यतीम
सांत्वना – करोर
देश – मुल्क, वतन
नाश – तबाही, बरबादी
संभावना – गुंजाइश
विधवा – बेवा
बार – दफा
इनाम – तोहफे
योग्य – काबिल
व्यक्ति – शख्स
चिंता – फिक्र

प्रश्न 2.
कैदी बाप को अपनी बेटी का खत एक आंसूनामा था, क्यों?
उत्तरः
बाप और बेटी दोनों जेल में था। बाप रंगून में है तो बेटी यहाँ दिल्ली में। सख्त नज़रबंदी के बावजूद भी उस बेटी ने पिता को एक चिट्ठी भेजा, जिसमें अपने परिवार एवं देश की दुस्थिति का वर्णन हुआ है। खत पढ़कर पिता की आँखें भीग गई। उस कैदी बाप को पुत्री का खत एक आँसूनामा ही लगा।

प्रश्न 3.
दिल्लीवाले मुझको रोते ……. मैं भी रोता हूँ – यहाँ शासक का कौन सा गुण प्रकट होता है?
उत्तरः
प्रजाहित केलिए शासन करनेवाले एक सम्राट की देशस्नेह और सहानुभूति प्रकट होती है।

प्रश्न 4.
यह खत तुमको मिलेगा भी या नहीं – बादशाह के मन में ऐसा शक क्यों उभरा होगा?
उत्तरः
बादशाह ने ऐसे अनेक व्यक्तियों को देखा है, जो आखिर में दगाबाज और दूसरों के द्वारा भेजे गए जासूस सिद्ध हुआ है। इसलिए उनके मन में शंका उभर आई।

बेटी के नाम अनुवर्ती कार्य:

प्रश्न 1.
बादशाह की चरित्र-चित्रण।
उत्तरः
1857 की स्वतंत्रता संग्राम के बाद बहादूरशाह ज़फर को कैदी बनाकर रंगून भेजा गया। उनकी बड़ी बेटी दिल्ली में अंग्रेजों के कैदी में था। अपनी बेटी का खत उन्होंने बार-बार पढाया। खत पढकर उनकी आँखों से आँसू बहती है। अंग्रेज़ी सरकार के कैद में किसी दूर देश में रहने पर भी उनके मन में अपने देश और परिवारवालों के प्रति अगाध प्रेम था। अपनी जनता के बारे में सोचकर वह रोती है। उनको अपने दिल्लीवासियों के प्रति प्रेम और सहानुभूति था। बेटी के नाम पर लिखी गई खत में वह अपने देश की बुरी हालत का जिक्र भी करती है।

वे एक आदर्श देशप्रेमी एवं प्यारी पिता थे। कोसों दूर की कैद में रहकर भी उसका मन अपने परिवारवालों एवं दिल्लीवासियों के प्रति व्याकुल थे।

प्रश्न 2.
बादशाह ज़फर की डायरी।
उत्तरः
रंगून, 18/5/1857

बुधवार

आज बेटी का खत मिला। बार-बार पठा। मन न भरा। हाँ, आज का दिन आँसू से भीगा एक दिन था। मेरी बेटी की अवस्था अब कैसी होगी? एक बार उसे देखने की इच्छा है, लेकिन कैसे? हमारी दिल्लीवासियों की हालत! वे लोग मेरे प्रति रोते हैं। मेरी स्थिति भी भिन्न नहीं है। एक बार उन लोगों को देख सकने की इच्छा थी। बेटी का खत मिता, जवाब भी लिखा । कैसे भेजें? हाँ, कल किसी व्यक्ति का आश्रय लेना है। यदि उसने धोखा दे तो…..। शायद मेरे अंतिम शब्द होगा। यहाँ इस कैद से बाहर आना मुश्किल है। किसी दिन हमारा देश स्वतंत्र होगा तब मैं नहीं होगा। स्वतंत्रता की प्रतीक्षा में ………..

प्रश्न 3.
सुरभि केलिए जवाबी पत्र।
उत्तरः
प्रिय सुरभि,
तुम्हारा खत मिला। पढ़कर खुशी हुई। साथ सी.डी.भी मिला।

मैं ने उसे देखा। तुमने सच ही कहा था। बहुत जोशीला था। दर्शकों के मन में ज़रूर देशस्नेह उत्पन्न करेगा। ठीक है परीक्षा की इस समय ऐसी एक सी.डी.बहुत खुशी प्रदान करती हैं। कितने महानों का जान हमारे लिए नष्ट हो गया हैं?

सी.डी. भेज देने केलिए मैं बहुत आभारी हूँ। घरवाले भी देखा। उसको भी अच्छा लगा। अभी कुछ और पढना है। घरवालों को मेरा प्यार। फिर मिलने की प्रतीक्षा में

प्यार से,
तुम्हारी सहेली
सोनु

पत्तनमतिट्टा,
10.07.2015

प्रश्न 4.
‘कितने बच्चे यतीम हो गए, कितनी औरतें बेवा हो गई। पत्र के इस प्रसंग के आधार पर ‘युद्ध के भीषण परिणाम’ पर एक कॉलाज़ तैयार करें।
उत्तरः
Plus Two Hind Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 1


सूचनाः

बहादुरशाह ज़फ़र के खत का यह वाक्य पढ़ें।

दिल्लीवाले मुझको रोते होंगे। वे क्या यह नदीं जानते, कि मैं भी उनको रोता हूँ।

प्रश्न 1.
उपर्युक्त वाक्य के आधार पर बहादुरशाह ज़फ़र के चरित्र पर टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
चरित्र चित्रण – बहादुरशाह ज़फ़र भारत के अंतिम मुगल बादशाह है। 1857 की स्वतंत्रता संग्राम के बाद बादशाह को अंग्रेजों ने कैदी बनाया। किसी दूर देश के कैद में रहने पर भी मन में देश और परिवारवालों के प्रति अगाध प्रेम झलकता है। वह अब भी अपनी प्रजा के बारे में सोचते है। एक सच्चा शासक होने के कारण वह अपने प्रजा के बुरी हालत के बारे में सोचनेवाला है। अपनी लापरवाही को वह ठीक तरह से जानते है।

प्रश्न 2.
बेटी के आँसूनामा ने बादशाह के मन को विचलिक कर दिया। वे उस दिन की डायरी में इसका जिक्र करते हैं।
वह डायरी लिखें।

  • परिवारवालों की सोच।
  • दिल्लीवासियों के प्रति आकुलता।
  • खत पढ़ने उत्पन्न दर्द।

उत्तरः

डायरी

रंगून

बुधवार
18 जूण 1851

आज बेटी का खत मिला। बार-बार पढ़ा, मन न भरा । हाँ आज का दिन आँसू से भीगा एक दिन था। मेरी बेटी की अवस्था अब कैसी होगी? एक बार उसे देखने की इच्छा है, लेकिन कैसे? हमारी दिलीवासियों की हालत । वे लोग मेरे प्रति रोते है, मेरी स्थिति भी भिन्न नहीं है। एक बार उन लोगों को देख सकने की इच्छा थी। बेटी का खत मिला, जवाब भी लिखा, कैसे भेजूं? हाँ, कल किसी व्यक्ति का आश्रय लेना है। यदि उसने धोखा दे तो….। शादय मेरे अंतिम शब्द होगा। यहाँ इस कैद से बाहर आना मुश्किल है, किसी दिन हमारा देश स्वतंत्र होगा तब मैं नहीं होगा। स्वतंत्रता की प्रतीक्षा में ……..।

प्रश्न 3.
सूचना : बादशाह के ये वाक्य पढ़ें।
तीन दफ़ा सुनने के बाद भी दिल को करार नहीं आया। मेरे यहाँ आ जाने के बाद, पता नहीं और क्या-क्या परेशानियाँ शहरवालों पर पड़ी होंगी। इन वाक्यों के आधार पर बहादुरशाह ज़फ़र के चरित्र पर टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
बहादुरशाह ज़फर बड़े देशप्रेमी है। साथ ही साथ वे ‘स्वाभिमानी एवं परिवारवालों से प्यार करनेवाला है। अपने परिवार एवं देश से दूर रहते हुए वे अत्यंत दुःखी है। दूसरों के प्रति उनके दिल में सहानुभूति एवं ममता है। अपने देश और देशवासियों के प्रति उनके दिल में सच्चा प्यार है। इसीलिए ही कैद में रहते हुए भी वे अपने देश और परिवारवालों के बारे में सोचकर सदा खिन्न रहते थे।

प्रश्न 4.
बादशाह के बेटे ने खत तीन दफ़ा पढ़कर सुनाया। बेटे की उस दिन की डायरी लिखें।

  • पिताजी का दर्द
  • बहन की हालत
  • बेटे का मानसिक संघर्ष ।

उत्तरः

18
फरवरी

1857
रंगून

कैसे भूलूँ आज का दिन …….
अपने पिताजी की आँसू …….
बहन की दर्दभरी वाणी …….
कैसे सब सकूँगी वह। जो मैंने पढ़कर सुनाया, क्या वह एक खत था? नहीं आँसूनामा था।
मेरी प्यारी बहिना…. कहाँ हो तुम? कैसे हो तुम?
केवल आप ही नहीं यह पूरा देश गुलाम बन गया है। मेरे दिल्लीवासी ……
मेरे पिताजी …….
….. उनकी क्या दशा होगी!!
ऐ खुदा, मेरे देश की, देशवासियों की रक्षा करें।

‘बेटी के नाम’ पाठ का यह वाक्य पढ़ें।

“खत क्या भेजा, मेरी जान, आँसूनामा था।” यह बादशाह द्वारा बेटी को लिखे गए पत्र का अंश है।

प्रश्न 1.
बादशाह ने ऐसा क्यों लिखा होगा?
उत्तरः
बाप और बेटी दोनों जेल में था। बाप रंगून में है तो बेटी दिल्ली में। बेटी द्वारा भेजे चिट्ठी में अपने परिवार एवं देश की बुरी हालत का वर्णन हैं। खत पढ़कर बादशाह को बहुत दुख हुआ। इसलिए बादशाह ऐसा लिखा होगा।

प्रश्न 2.
बादशाह के उस दिन की डायरी तैयार करें।
उत्तरः
रंगून / 18/5/1857 / बुधवार
आज बेटी का खत मिला। बार-बार पढ़ा। मन न भरा। हाँ आज का दिन आँसू से भीगा दिन हुआ। मेरी बेटी की अवस्था अब कैसी होगी? एक बार उसे देखने की इच्छा हैं, लेकिन कैसे?

हमारी दिल्लीवासियों की हालत! वे लोग मेरे लिए रोते हैं। मेरी हालत भी भिन्न नहीं है। एक बार उन लोगों को देखने की इच्छा थी।

बेटी का खत मिला, जवाब भी लिखा। कैसे भेजूं? कल किसी व्यक्ति का आश्रय लेना है। यदि उसने धोखा दिया तो…..। शायद मेरे अंतिम शब्द होगा। यहाँ इस कैद से बाहर आना मुश्किल है।

किसी दिन हमारा देश आज़ाद होगा – यही मेरा उम्मीद है। इसी प्रतीक्षा में……।

‘बेटी के नाम’ पाठ का यह वाक्य पढ़ें।

“मैं तो जिंदा हूँ।
वे तो बिना आई मैत र गए।”

प्रश्न 1.
यहाँ दिल्लीवालों की कौन सी हालत की सूचना मिलती है?
उत्तरः
यहाँ दिल्लीवालों की बुरी और दर्दनाक हालत की सूचना हैं। स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने दिल्लीवासियों पर भीषण अत्याचार किया था।

प्रश्न 2.
भारत की आजादी की लड़ाई में हज़ारों ने अपनी जान की कुर्बानी दी। इन कुर्बानियों का जिक्र करते हुए आप अपने मित्र को एक पत्र लिखें।
उत्तरः

तृश्शूर
08.08.2017

प्रिय मित्र रामू
तुम तो ठीक-ठीक है न । पढ़ाई कैसे चल रहे हैं। माँ-बाप सकुशल है न। सब को मेरा प्रणाम।

हमारे बारहवी कक्षा के हिंदी पाठ्यपुस्तक में पहला स्वतन्त्रता संग्राम के समय भारत के बादशाह बहादुर शा जफर का एक खत है। यह खत पढ़कर मुझे बहुत दुःख हुआ, साथों साथ अभिमान भी। क्योंकि हजारों की कुर्बानी की कथा हमारे स्वतंत्रता के पीछे हैं। आज हमारे पीढ़ी में इस विचार नहीं है कि कितने व्यक्तियों के कठिन परिश्रम के कारण ही हमें आज़ादी मिली हैं। हमें ज़रूर इस बात पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि कल के प्रयत्न का फल ही हम भोग रहे हैं। मुझे बहुत खुशी हैं कि यह बात तुमसे बताकर । तुम्हारे मित्रों को भी इसके बारे में ज़रूर बताना। हो सके तो इसी प्रकार के कहानियाँ और घटनाओं को पढ़ना भी। खत समाप्त करता हूँ। जरूर जवाब लिखना।

तुम्हारा दोस्त,
अप्पू

प्रश्न 3.
‘तीन दफ़ा के बाद भी दिल को करार नहीं आया। बेटी के प्रति बादशाह का प्यार हमारे दिल को छूने वाला है। ‘संतानों के भविष्य निर्माण में माँ-बाप का प्यार’ विषय पर एक लेख लिखें।
उत्तरः

संतानों के भविष्य निर्माण में माँ-बाप का प्यार

आज के बच्चे कल का नागरिक है; तो ज़रूर बच्चों के विकास में ध्यान देना ज़रूरी है। माँ-बाप अपने अनुभवों के साथ बच्चों को पढ़ाना चाहिए। घर ही बच्चों के पहला विद्यालय होता है। बच्चों को घर में ही सच्चे प्यार के रिश्ते का अनुभव होना है। बाप बेटे में होते सच्चा प्यार ही उसे जीवन में ताकत और अच्छा नमूना देंगे। बेटी के नाम पाठ में लिखे खत, मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर जेल में रहकर अपनी बेटी को लिखे प्यार का नमूना बन जाता है। सिर्फ प्यार ही नहीं वात्सल्य और देशप्रेम भी यहाँ प्रकट होता है।

क्या आज के माता पिता और बच्चों के बीच में ऐसा प्यार का रिश्ता है? प्यार और सहयोग हमारे परिवारों से पहले सीखना चाहिए। माँ-बाप को अपने भरोसा और परंपरागत मूल्यों को बच्चों तक पहुँचाना ही चाहिए। ताकि बच्चे समझे कि हम भी एक दिन बड़े हो जायेंगे और दायित्वों के पूर्ती करना होगा। माता पिता केवल भोजन और पालन पोषण करनेवाला नहीं है। ये तो छात्रावासों में भी मिलते हैं। लेकिन भविष्य में अपने आदतों और मूल्यों को अपने अनुभवों के साथ बच्चों को सिखाना हैं। एक अच्छे कल के लिए माँ-बाप का दायित्व बहुत बड़ा है। प्यार और उत्तम विश्वास के साथ ये निभाना भी चाहिए।

‘बेटी के नाम’ पाठ का निम्नलिखित वाक्य पढ़ें।

“दिल्लीवाले मुझको रोते होंगे, मैं भी उनको रोता हूँ।’

प्रश्न 1.
शासक का कौन-सा गुण यहाँ प्रकट होता है?
उत्तरः
प्रजाहित केलिए शासन करनेवाले एक सम्राट के देशप्रेम । और सहानुभूति प्रकट होती हैं।

प्रश्न 2.
‘सच्चा शासक कौन है’ विषय पर एक लेख लिखें।
उत्तरः
सच्चा शासक शासक का मतलब क्या है? क्या केवल प्रजा पर अधिकार थोपनेवाले ही शासक है? नहीं; एक सच्चा शासक इससे परे है। एक सच्चा शासक के गुण को हम देखेंगे। भारत एक ऐसा देश है जहाँ कई ऐसे शासक थे जो प्रजा के ऊपर नहीं बल्कि उनके हृदय में राज करते थे। एक सच्चा शासक अपने प्रजा की भलाई के लिए काम करते हैं। उनके लिए कई कार्यक्रमों और योजनाओं के निर्माण करते हैं। मुसीबत आने पर उनके सहायता करते हैं। अपने खुशी में प्रजा को भी भागीदार बनाते हैं। अपनी प्रजा के हानी अपनी हानी समझती है। केवल ऐश-आराम में जीवन व्यतीत नहीं करते हैं। एक सच्चा क्रान्तदर्शी होता है, जो आनेवाले कल केलिए, देश की भलाई केलिए सोचते हैं।

इसी प्रकार के शासकों को जनता अपने दिल में जगह देते हैं। हमारे भारत को ऐसा नाम मिला राजा भरत से। वह प्रजा के दिल में रहते थे। इसी प्रकार के राजा या शासक हमारे समाज केलिए अनिवार्य है। आज जनतंत्रात्मक देश होने के कारण हम ही हमारा शासक है। लेकिन शासक होने के बाद कई लोग यह भूल जाते हैं कि वह भी एक प्रजा है। सत्ता को केवल अपने लाभ केलिए प्रयुक्त शासक सच्चा शासक नहीं है। प्रजा केलिए अपने आपको अर्पण करने वाला ही सच्चा शासक है।

प्रश्न 3.
बेटी का खत पढ़कर बादशाह का मन विचलित हो गया। दुखी पिता को सांत्वना देते हुए पिता से बातें करता है। दोनों के बीच की बातचीत तैयार करें।
उत्तरः
बादशाह : दिल्लीवालों के बारे में सोचकर मुझे इतना दुख हो रहा है कि सह नहीं पाता।

बेटा : आप अधीर मत हो जइए पिताजी। आप ही अधीर हुआ तो बाकी लोगों की हालत क्या होगा।

बादशाह : मैं क्या करूँ। तुमने ही खत पढ़ा था कुलसुम की। क्या-क्या हालत लिखा है वह। मैं क्या करूँ।

बेटा : अंग्रेज़ों ने अपनी क्रूरता ज़रूर दिखाया है। फिर भी हम भारतीय किसी भी हालत में सब कुछ सहन कर लेंगे। कुलसुम भी डरपोक नहीं है। उसमें सब सहने की शक्ति है।

बादशाह : मुझे अपने प्रजा के लिए कुछ करना है। पर मैं यह कैद में रहकर क्या कर सकता हूँ।

बेटा : पिताजी एक न एक दिन हम इस गुलामी से जरूर मुक्त हो जायेंगे। भारत की आजादी अब दूर नहीं है।

बादशाह : मुझे गर्व है मेरी बेटी पर। वह इतनी मासूम थी लेकिन अब वह इतनी मज़बूत हो गयी है कि सब कुछ सहन कर रही है।

बेटा : आप ने ठीक ही कहा पिताजी। हमारी बहन जैसे अनेक औरतों की दिल इतना मज़बूद हो गया है कि अगली पीढ़ी के जोश को अंग्रेज़ रोक नहीं पायेंगे। हम ज़रूर आज़ाद हो जायेंगे।

बादशाह : यह सब सुनकर मन को कुछ सुख मिला बेटा। तुमने सही कहा हैं।

बेटी के नाम कवि का परिचय

बहादुर शाह ज़फर बहादुर शाह जफर दिल्ली के अंतिम मुगल बादशाह 1857 करके ब्रिटीश सरकार ने इन्हें कैदी करके रंगून भेजा। इधर दिल्ली में अंग्रेज़ों की कैद में था, इसकी बड़ी बेटी कुलसुम जमानी बेगम। सख्त पहरों के बीच में भी ये दोनों चिट्टियाँ भेजता रहा। अपनी बड़ी बेटी द्वारा कैदी बाप को भेजा गया पत्र का जवाबी पत्र यहाँ प्रस्तुत है।


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